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Monday, November 28, 2022

WHO: कोरोना का Lambda Variant ने 30 से ज्यादा देशों में दी दस्तक

नई दिल्ली। अभी दुनिया में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट (Delta Variant) का प्रकोप कम नहीं हुआ है कि इसके एक नए वैरिएंट लैम्बडा वैरिएंट से खतरा महसूस किया जाने लगा है। ब्रिटेन में कोरोना का नया वैरिएंट पाया गया है।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कोरोना के नए वैरिएंट की जानकारी साझा की है। वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस लैम्बडा वैरिएंट (Lambda Variant) को एक नए उभरते खतरे के रूप में देख रहे हैं। गत 14 जून को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना का सबसे नया एवं सांतवां वैरिएंट बताया और इसे वैज्ञानिक नाम C.37 दिया। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने इस नए वैरिएंट के व्यवहार पर नजर रखने की सलाह दी है।

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इसके 23 फरवरी से लेकर 7 जून के बीच कुल छह मामले सामने आए हैं। सभी छह मामलों में पांच ने विदेश यात्रा की थी, जिसके बाद लोग संक्रमित हुए। बता दें कि लैमडा वैरिएंट का पहला मामला पेरू में दर्ज किया गया था। इस वेरिएंट को C.37 स्ट्रेन के रूप में भी जाना जाता है।

 

विश्व में डेल्टा कोरोना वायरस तेजी के साथ पैर पसार रहा है। Covid-19 का डेल्टा वैरिएंट पहली बार भारत में पाया गया था, लेकिन अधिक संक्रामक होने के कारण मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ब्रिटेन ने डेल्टा वेरिएंट के करीब 35 हजार नए मामले दर्ज किए हैं।

कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की तरह यह लैम्बडा वैरिएंट 30 से ज्यादा देशों में मिला है। इसके ज्यादा संक्रामक होने की आशंका जताई जा रही है। हाालंकि, इस वायरस के संक्रमण पर अभी ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। पेरू और दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों में लैम्बडा वैरिएंट का असर ज्यादा पाया गया है। यह वैरिएंट अभी भारत में नहीं मिला है लेकिन यह हाल में ब्रिटेन एवं यूरोप के अन्य देशों में मिला है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में लैम्ब्डा संस्करण को ‘चिंता के प्रकार’ के रूप में घोषित किया है। 14 जून को, WHO ने इस संस्करण को, जिसे पहले C.37 के रूप में जाना जाता था, सातवें और नवीनतम के रूप में नामित किया। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने इसे एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने वाला वैरिएंट के रूप में मान्यता दी है।

अभी तक WHO द्वारा सूचीबद्ध SARS-CoV-2 के आधिकारिक 11 वेरिएंट हैं। सभी SARS-CoV-2 वेरिएंट अपने स्पाइक प्रोटीन में उत्परिवर्तन द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं – वायरस के घटक जो इसे मानव कोशिकाओं पर आक्रमण करने की अनुमति देते हैं।

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डब्ल्यूएचओ बुलेटिन में कहा गया है, “लैम्ब्डा में संदिग्ध फेनोटाइपिक प्रभाव के साथ कई उत्परिवर्तन होते हैं, जैसे संभावित वृद्धि हुई ट्रांसमिसिबिलिटी या एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने के लिए संभावित वृद्धि प्रतिरोध।”

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा, “यह लैम्बडा वैरिएंट से जुड़े प्रभाव की पूरी सीमा पर वर्तमान में सीमित सबूत हैं, और प्रतिरूप पर प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने और प्रसार को नियंत्रित करने के लिए फेनोटाइप प्रभावों में और मजबूत अध्ययन की आवश्यकता है।” “टीकों की निरंतर प्रभावशीलता को मान्य करने के लिए आगे के अध्ययन की भी आवश्यकता है।”

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Priya Tomar
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