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Tuesday, December 6, 2022

कोरोना वायरस के नए बदलाव को ना समझने से देश में बढ़ रही है परेशानी

नई दिल्ली। देश में कोरोना की दूसरी लहर से हर किसी को परेशान कर रखा है, हर दूसरा इंसान कोरोना संक्रमित है। इसके चलते सरकार हर संभव कोशिश कर रही है परंतु स्थिति खराब होती जा रही है। अब इस मामले में राजधानी के डॉक्टरों का कहना है कि कोई भी नए बदलाव को समझ ही नही पा रहा है जिसके चलते इतनी परेशानी हो रही है।

आपको बता दे कि आज से लगभग 1 साल पहले कोरोना महामारी आई थी जिससे दुनियां को हिला कर रख दिया था। परंतु फिर धीरे-धीरे चीजे सही होने लगी थी और बैक्सीन भी आ गई थी तो लोगों में थोड़ी सी राहत थी। परंतु पिछले कुछ दिनों से कोरोना की दूसरी लहर आ गई और ये हर तरीके से रिकॉर्ड तोड़ रही है। हर राज्य में कोरोना के मामले हद से ज्यादा आ रहे है।

अब इस मामले में अलग अलग डॉक्टरों का बयान आ रहा है, राजधानी के डॉक्टरों का कहना है कि सरकार अभी भी पिछले अनुभव के आधार पर कार्य कर रही है लेकिन उनका ध्यान मरीजों की मेडिकल स्थिति पर नहीं है। पिछली बार की तुलना में इस बार वायरस काफी आक्रामक हुआ है। दो दिन में ही मरीज की स्थिति गंभीर हो जा रही है। इतना ही नहीं यह काफी तेजी से फैलने की क्षमता भी रखता है।

दूसरे डॉक्टर का कहना है कि,- दिल्ली में कई तरह के म्यूटेंट वायरस हैं जिनमें काफी तेजी से फैलने की क्षमता है। अभी सामने आ रहे मरीजों की स्थिति पर अधिक अध्ययन भी नहीं हुआ है। अस्पताल में जब मरीज भर्ती होता है तो उसे डॉक्टर पुराने अनुभव और नए ज्ञान के आधार पर उपचार देता है लेकिन एक या दो दिन में ही उसे नई तस्वीर दिखाई देती है। जबकि सरकार की योजना में इस तरह का बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।

इसी कड़ी में दूसरे डॉक्टर का बयान आया है,- दो-दो दिन में संक्रमित मरीज की सांस फूलने लग रही है। जीनोम सिक्वेसिंग का डेटा भी काफी कम है। ऐसे में हम नए म्यूटेशन को लेकर बहुत कुछ अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। हालांकि सरकार को जीनोम सिक्वेसिंग को बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। दिल्ली में अभी यूके के साथ साथ पिछले एक साल से रह रहे वायरस में दो से तीन बदलाव भी हुए हैं जिनकी वजह से यह पहले से ज्यादा ताकतवर बन चुका है। इसलिए दिल्ली सरकार को पुराने अनुभव के साथ साथ नए म्यूटेशन को समझना भी बहुत जरूरी है।

इसके अलावा एक शोध में कहा जा रहा है कि नाइट कर्फ्यू की सोच पूरी तरह से फेल साबित हुई है। अब तक दिल्ली में ही नाइट कर्फ्यू से एक भी केस कम नहीं हुआ है। दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही हालात हैं। इस वक्त सरकार को एक बार फिर से नई रणनीति के साथ काम करने की आवश्यकता है। अन्यथा अस्पतालों में एक क्षमता तक बिस्तर बढ़ाने के बाद फिर कोई रास्ता नहीं बचेगा।

Priya Tomar
Priya Tomar
I am Priya Tomar working as Sub Editor. I have more than 2 years of experience in Content Writing, Reporting, Editing and Photography .

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