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Monday, June 27, 2022

President Election: आखिर कौन होगा देश का नया महामहिम, यहां देखिए लिस्ट

नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। आज राष्ट्रपति पद के रूप में उम्मीदवारी के लिए विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा के नाम के के बाद अब हर किसी की नजर इस बात पर आ टिकी है कि आखिर कौन—कौन राष्ट्रपति पद का दावेदार हो सकता है, राजनीतिक गलियारों में आखिर किनका नाम इस चर्चा में शुमार है।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर हुई बैठक में अहम फैसला
विपक्षी दलों की ओर से मंगलवार को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर हुई बैठक में अहम फैसला लिया गया। सूत्रों के मुताबिक बैठक में सर्वसम्मति से यशवंत सिन्हा को विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाने का फैसला किया गया। जानकारी के अनुसार यशवंत सिन्हा 27 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यशवंत सिन्हा के कंपेन को आगे बढ़ाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है।

वरिष्ठ कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम चाहते हैं कि ऐसा प्रत्याशी सामने रखा जाए जो, लोकतंत्र की रक्षा कर सके। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए आम सहमति बनाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।

बैठक में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा ने किया ट्वीट
गौरतलब है कि इस बैठक में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा ने ट्वीट किया कि टीएमसी में उन्होंने मुझे जो सम्मान और प्रतिष्ठा दी, उसके लिए मैं ममता बनर्जी का आभारी हूं। अब वह समय आ गया है, जब एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए मुझे पार्टी से हटकर विपक्षी एकता के लिए काम करना चाहिए। मुझे यकीन है कि पार्टी मेरे इस कदम को जरूर स्वीकार करेगी।

सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दलों की इस बैठक में 13 दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम दल के प्रतिनिधि थे। विपक्ष का कहना है कि आम राय से राष्ट्रपति का चुनाव किया जाए। मंगलवार शाम को बीजेपी संसदीय दल की बैठक भी होनी है, अब देखना होगा कि क्या सत्तारूढ़ दल की ओऱ से आज ही किसी नाम पर मुहर लगती है। नाम तय होने से पता चलेगा कि यशवंत सिन्हा के मुकाबले सरकार की ओर से किसे मैदान में उतारा जाता है।

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आपको बताते चलें कि​ राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी के लिए शरद पंवार, फारुख अब्दुल्ला और गोपाल कृष्ण गांधी विपक्ष के इस ऑफर को ठुकरा चुके हैं। महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी ने सोमवार को ही विपक्ष के नेताओं को राष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम सुझाने पर धन्यवाद देते हुए चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई थी।

आइए जानें दावेदारों के नाम और उनकी चर्चा क्यों

राष्ट्रपति चुनाव के समीकरणों के साथ बीजेपी अब 2024 के लोक सभा चुनाव पर नजर गढाए हुए है। माना जा रहा है कि वो देश के नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मास्टर स्ट्रोक खेल सकती है। बीजेपी और आरएसएस के बीच चार नामों को लेकर सबसे अधिक चर्चा है। इनमें यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान, और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू शामिल हैं। तो भाजपा किसी आदिवासी उम्मीदवार को भी इस पद का दावेदार बना सकती है।

बीजेपी 2024 के लोक सभा , विधान सभा चुनाव समीकरणों को भी रख रही
दरअसल देश के प्रथम नागरिक को चुनने के लिए होने जा रहे चुनाव के जरिए बीजेपी 2024 के लोक सभा चुनाव और आगामी विधान सभा चुनावों के समीकरणों को भी ध्यान में रख रही है। इस तरह बीजेपी एक तीर से कई निशाने लगाने का प्रयास कर रही है। बताते चलें कि लोक सभा की 543 सीटों में से 47 एसटी कैटेगिरी के लिए आरक्षित हैं। 62 लोक सभा सीटों पर सीधे-सीधे आदिवासी समुदाय प्रभावी है. इसी तरह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं।

आनंदी बेन पटेल महिलाओं में भी एक बड़ा सियासी संदेश 
पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में दलित समाज से आने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर दूसरा बड़ा संदेश दिया। अब भाजपा एक महिला को राष्ट्रपति बनाकर 2024 से पहले महिलाओं में भी एक बड़ा सियासी संदेश देना चाहती है। आनंदी बेन पटेल पीएम नरेंद्र मोदी की बेहद करीबी हैं। वे यूपी की राज्यपाल हैं। गुजरात की सीएम रह चुकी हैं। लेकिन 80 की उम्र पार कर चुकी आनंदी बेन पटेल के लिए उनकी उम्र इस पद के लिए बाधक बन सकती है।

वेकैंया नायडू, आरिफ मोहम्मद खान
आंध्र प्रदेश के रहने वाले वेकैंया नायडू लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं। 2002 से 2004 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। अटल बिहारी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं। मोदी सरकार में शहरी विकास, आवास, शहरी गरीबी उन्मूलन, सूचना प्रसारण तथा संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे की कमान संभाल चुके हैं। अगस्त 2017 से नायडू उपराष्ट्रपति हैं। नायडू को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा दक्षिण भारत में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए बड़ा सियासी संदेश दे सकती है।

वहीं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी इस पद के लिए नया चेहरा हो सकते हैं। उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले आरिफ राजीव गांधी सरकार में उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने शाहबानो केस को लेकर केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। तीन तलाक, सीएए जैसे मामलों के बाद से भाजपा उन्हें प्रगतिशील विचारधारा का मानती है।

सूत्रों के मुताबिक इस सिलसिले में चल रहे बाकी नामों से इतर पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, जुअल ओरांव तथा छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उइके प्रमुख आदिवासी नेता हैं, जिनके नाम राष्ट्रपति पद के लिए चर्चा में काफी समय से चल रहे हैं।

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